जो लहर आएगी वह कुछ देकर ही जाएगी

जो लहर आएगी वह कुछ देकर ही जाएगी
मानव तुम डरना मत जीवन की इन लेहेरों से
मत छोड़ना बनाना घरोंदें इन सागर के किनारों पे

यह लहर तेरा घर तो तोड़ जाएगी
पर शंख मोती मणि सब तेरे लिए छोड़ जाएगी
घर तेरा भले ही बिखर जाए कला न तेरी जाएगी
लेकिन अगर छोड़ दिया बनाना तुमने तो यह ज़िन्दगी पचताएगी
जो लहर आएगी वह कुछ देकर ही जाएगी

भीरुता से कोई क्या पता है
लड़ता जा अरे तेरा क्या जाता है
क्या साथ आया था क्या साथ जायेगा
पर तेरा बनाया पथ किसी भटके को काम आएगा
डर कर जो भागा तो यह लहर खा जाएगी
अपनाएगी भी नहीं भीरु किनारे छोड़ जाएगी
जो लहर आएगी वह कुछ देकर ही जाएगी

जीवन तो युद्ध है इन आती जाती लेहेरों से
मत डर इन उफनाते पानी गेहेरों से
इसी समुद्र में मुक्ति का पथ छुपा है
जो डटा रहा अंतिम तक वही मुक्त हुआ है

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1 Comment on "जो लहर आएगी वह कुछ देकर ही जाएगी"

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sktapasvi
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