तेरी दुनिया से उठ गयी खुदाई है, सब आया बस कयामत ही नहीं आयी है

तेरी दुनिया से उठ गयी खुदाई है, सब आया बस कयामत ही नहीं आयी है

जहाँ से चलेथे वहीँ आज पहुंचे, शहर-शहर गली-गली रुसवाई ही रुसवाई है

है भीड़ में अकेले, अकेले में एकाकी, हर तरफ बस तनहाई ही तनहाई है

तेरी दुनिया से उठ गयी खुदाई है, सब आया बस कयामत ही नहीं आयी है

अरसा बीत गया चाँद को देखे, तुझे न देखने की कसम जब से खाई है

वफ़ादारी में हम हो गए और भी पक्के, असर कर गयी इतनी तेरी बेवफ़ाई है

सबकी आँखों का पानी भी सूख गया, अपनी आँखों में आंसू देखकर हंसी आई है

तेरी दुनिया से उठ गयी खुदाई है, सब आया बस कयामत ही नहीं आयी है

आज़ादी की कीमत क्या होती है उन्से पूछो, सरहद पर जानें जिन्ने लुटाई है

मिले तन मिट्टी में, धरती में लहू, सबसे सची येही रुबाई है

तेरी दुनिया से उठ गयी खुदाई है, सब आया बस कयामत ही नहीं आयी है

मैय हाथ में थी मरते दम तक, सबने छोड़ दिया बस ये हमें न छोड़ पाई है

कंधा देने के लिए था नहीं कोई, चला कर कब्र तक ले आयी है

दुनिया में मिसाल करदी कायम, सबसे सच्ची दोस्ती इसीने निभाई है

तेरी दुनिया से उठ गयी खुदाई है, सब आया बस कयामत ही नहीं आयी है
Share Button

Prashant

Technologist,by profession. Principled,by nature. Nonconformist,by choice. Thinker,by habit. Corporate Slave,by force. Dreamer,by desire. Seeker,by destiny.